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किस की शह होगी और किस की मात, यह फैसला 15 अक्‍तुबर हो जाएगा

राजनीति की बिसात पर मोहरे सज चुके हैं। किस की शह होगी और किस की मात, यह फैसला 15 अक्‍तुबर हो जाएगा, जब प्रदेश की जनता अपना मत देने के लिए घरों से बाहर निकलेगी। इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग है। इस मामले में भी कि इस बार पहले से कहीं अधिक दल चुनावी मैदान में हैं। जनता को इन्‍हीं दलों और नेताओं के बीच अपने जन‍प्रतिनिधियों का चयन करना है। यह कुछ ऐसा ही है, जैसा कि कोयले की खान से हीरा निकालना।

हम तोशाम विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो वहां सभापा अध्‍यक्ष श्री सुदेश अग्रवाल सहित 23 नेता चुनाव लड रहे हैं। लगभग 1 लाख 90 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में साल 2000 से कांग्रेस का कब्‍जा है। कांग्रेस सरकार में मंत्री किरण चौधरी इस बार फिर यहां से मैदान में है। बाकी दलों के अलावा 11 निर्द‍लीय प्रत्‍याशी इस सीट से ताल ठोक रहे हैं। इनमें से आपको किसी एक का चयन करना है। किस आधार पर करेंगे आप चयन।

इतिहास बताता है कि इस सीट पर निर्दलीय प्रत्‍याश्‍ाी कभी विजय नहीं पा सके। ज्‍यादातर समय यहां भी कांग्रेस का कब्‍जा रहा। लेकिन इस बार स्थिति निश्‍चित तौर पर भिन्‍न है। कांग्रेस के कुशासन से नागरिकों में भारी नाराजगी है। भाजपा का भ्रम टूटने लगा है, यह उपचुनावों से साबित हो गया। वर्तमान विधायक किरण चौधरी ने यहां विकास के नाम पर कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिससे जनता उन्‍हें दोबारा अवसर दे। हां, इस दौरान उनका अपना विकास बखूबी हुआ है। पांच सालों में उनकी सम्‍पत्ति कई गुणा बढ गयी।

लेकिन जनता आज भी यातायात के साधनों, पीने के पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुवधिाओं के लिए तरस रही है। एक सशक्‍त व्‍यक्तित्‍व ही इस क्षेत्र को मजबूत विकास गति प्रदान कर सकता है। सभापा अध्‍यक्ष और तोशाम प्रत्‍याशी श्री सुदेश अग्रवाल का व्‍यक्तित्‍व तोशाम हलके के लोगों की कसौटी पर खरा साबित हो रहा है। वह एक ऐसी शख्‍सीयत हैं, जिनका राजनीति में आने का एकमात्र उद्देश्‍य है देश सेवा।
आज के समय जहां ज्‍यादातर नेता स्‍वार्थवश या कुछ पाने की खातिर राजनीति में आते हैं, वहीं इससे एकदम इतर श्री सुदेश अग्रवाल सब कुछ पाकर भी अगर राजनीति में आए हैं, तो वह सिर्फ इस प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए, जो उनकी स्‍वयं की जन्‍मभूमि है। यह फैसला आपको करना है कि तोशाम हल्‍के और प्रदेश की बागडोर किन हाथों में रहकर विकास कर सकती है।

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