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अटेली से समस्‍त भारतीय पार्टी की जीत है निश्‍चित

कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता
एक पत्‍थर तो तबीयत से उछालो यारो। 

इस उक्ति को सत्‍य कर दिखाया है सभापा के अटेली विधानसभा प्रत्‍याशी राव ओमप्रकाश अार्य ने। यूं तो हरियाणा की पूरी राजनीति जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है और इसी आधार पर अटेली के संभावित नतीजों का गणित भी फलाया जा रहा है। राजनीति के तथाकथित पंडितों के मुताबि क अटेली विधानसभा क्षेत्र की कमान बहुसंख्‍यक यादवाें के हाथ में है। अटेली में अकेले यादव वोटरों की संख्‍या लगभग 80 हजार है। 

हालांकि सभापा के अटेली विधानसभा प्रत्‍याशी राव ओमप्रकाश भी इसी बहुसंख्‍यक वर्ग से हैं। लेकिन समस्‍त भारतीय पार्टी वोट के जातिगत आधार को मान्‍यता नहीं देती। सभापा के राजनीतिक उत्‍थान की वजह केवल एक ही है और वह सच्‍चाई व ईमानदारी की राजनीति से भ्रष्‍ट व्‍यवस्‍था को परिवर्तित करना और सभी वर्गों व सम्‍प्रदायों के लिए समान विकास का अपराधमुक्‍त माहौल तैयार करना। 

अपने अथक प्रचार अभियान में राव ओमप्रकाश अार्य इसी आधार पर वोट अपील कर रहे हैं। यही वजह है कि अटेली के यादव समाज के साथ-साथ एससीएसटी, जिनके हित की बात प्रदेश में समस्‍त भारतीय पार्टी को छोडकर और कोई नहीं कर रहा, जाट, वैश्‍य और राजपूत समाज का समर्थन भी हांसिल हो रहा है। देश में आए बडे राजनीतिक बदलाव से हरियाणा भी अछूता नहीं है। यह बडा राजनीतिक बदलाव जो पिछले लोकसभा से लेकर कई राज्‍यों के विधानसभा चुनावों में देखने को मिला, वह है युवा वोटरों का ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में वोट डालने के लिए आगे आना। 

हरियाणा का युवा भी इस बात को समझने लगा है कि जातिवाद, धनबल और बाहुबल की बात करने वाली पार्टियां कभी उनका विकास नहीं कर सकती। वह इंतजार कर रहा था कि हरियाणा में किसी ऐसी पार्टी का उदय हो, जो प्रदेश को बांटने वाली स्‍वार्थ की राजनति से दूर सिर्फ और सिर्फ विकास की बात करना जानती है। अटेली में भी युवा वर्ग भारी संख्‍या में राव ओमप्रकाश के समर्थन में उतर आया है। राव ओमप्रकाश की जीत के साथ राजन‍ीतिक पंडितों का यह कयास सच साबित होने वाला है। 

राव ओमप्रकाश की जीत की संभावनाओं को इसलिए भी नहीं नकारा जा सकता, क्‍योंकि यादव समाज का प्रतिनिधित्‍व करने वाले अपने प्रतिद्वंद्वि उम्‍मीदवारों के बीच वह अकेले ऐसे प्रत्‍याशी हैं, जो अटेली विधानसभा के मूल निवासी हैं। कांग्रेस की अनीता यादव हों या भाजपा की संतोष यादव अथवा प्रदीप यादव जैसे चेहरे ये सारे प्रत्‍याशी बाहरी हैं। इसलिए अटेली की जनता द्वारा इन्‍हें समर्थन दिया जाना बेहद मुश्किल है। ये लोग न इस क्षेत्र की समस्‍याओं से वाकिफ हैं और न जनता के हितों और समस्‍याओं को समय ही दे सकते हैं। यह स्थिति भी राव ओमप्रकाश आर्य के हित में जाते हुए उनकी जीत का मार्ग प्रशस्‍त करती है।

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